मेरी हर बात को उल्टा वो समझ लेते हैं,
अब के पूछा तो कह दूंगा कि हाल अच्छा है..
खामोशियाँ में शोर को सुना है मैंने,
ये ग़ज़ल गुंगुनायेगी रात के साये में ।
मिला क्या हमें सारी उम्र मोहब्बत करके,
बस एक शायरी का हुनर, एक रातों का जागना..
ना पीछे मुड़ के देखो, ना आवाज़ दो मुझको,
बड़ी मुश्किल से सीखा है मैंने अलविदा कहना..!
कभी टूटा नहीं मेरे दिल से तेरी यादों का रिश्ता..
गुफ़्तगू किसी से भी हो ख़याल तेरा ही रहता है..
ना छेड़ किस्सा वोह उल्फत का बड़ी लम्बी कहानी है
मैं जिन्दगी से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है
हर किसी के हाथ मैं बिक जाने को हम तैयार नहीं..
यह मेरा दिल है तेरे शहर का अख़बार नहीं..
आज भी एक सवाल छिपा है.. दिल के किसी कोने मैं..
की क्या कमी रह गईथी तेरा होने में.
मेरी लिखी किताब, मेरे ही हाथो मे देकर वो कहने लगे
इसे पढा करो, मोहब्बत करना सिख जाओगे..!!
इतनी चाहत तो लाखो रुपए पाने की भी नही होती..
जितनी बचपन की तस्वीर देख कर बचपन में जाने की होती हैं
चुपचाप चल रहे थे.. हम अपनी मंजिल की तरफ..
फिर रस्ते में एक ठेका पड़ा.. और हम गुमराह हो गए।
ऐ जीन्दगी जा ढुंड॒ कोई खो गया है मुझ से.
अगर वो ना मिला तो सुन तेरी भी जरुरत नही मुझे.
कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे,
समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।
कितनी ही खूबसूरत क्यों न हो तुम..
पर मैं जानता हूँ.. असली निखार मेरी तारीफ से ही आता है..
होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं..
किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!
नक़ाब क्या छुपाएगा शबाब-ए-हुस्न को,
निगाह-ए-इश्क तो पत्थर भी चीर देती है..
ज़िन्दगी जोकर सी निकली
कोई अपना भी नहीं.. कोई पराया भी नहीं
मेरी आँखों में बहने वाला ये आवारा सा आसूँ
पूछ रहा है.. पलकों से तेरी बेवफाई की वजह..
दम तोड़ जाती है हर शिकायत लबों पे आकर,
जब मासूमियत से वो कहती है मैंने क्या किया है
अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास,
अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !
तुम बदलो तो.. कहेते हो मज़बूरीयाँ है बहोत,
और हम ज़रा सा बदले तो हम बेवफ़ा हो गए।
सुकून ऐ दिल के लिए कभी हाल तो पूँछ ही लिया करो,
मालूम तो हमें भी है कि हम आपके कुछ नहीं लगते।
यूँ बिगड़ी बहकी बातों का कोई शौक़ नही है मुझको,
वोपुरानी शराब के जैसी है,असर सर से उतरता ही नही।
बेवफा कहने से पहले मेरी रग रग का खून निचोड़ लेना,
कतरे कतरे से वफ़ा ना मिले तो बेशक मुझे छोड़ देना।
पीते थे शराब हम, उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर,
महफ़िल में गए थे हम, यारों ने पिलाई उसकी कसम देकर।
तेरी तलाश में निकलू भी तो क्या फायदा..
तुम बदल गए हो खो गए होते तो और बात थी।
तज़ुर्बा है मेरा मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने पाँव फिसलते देखे हैं।
उस शख्स का गम भी कोई सोचे..
जिसे रोता हुआ ना देखा हो किसी ने।
जाने क्या मासूमियत है तेरे चेहरे में,
तेरे सामने आने से ज्यादा तुझे छुपके देखना अच्छा लगता है।
खुद पर भरोसे का हुनर सीख ले..
लोग जितने भी सच्चे हो साथ छोड़ ही जाते हैं।
तेरा प्यार भी एक हजार की नोट जैसा है,
डर लगता है कहीं नकली तो नहीं|
आज इतना जहर पिला दो कि सांस तक रुक जाए मेरी,
सुना है कि सांस रुक जाए तो रूठे हुये भी देखने आते है…!
क्यूँ शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर ,
हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा हैं…
उम्र गुजार दी मैने गमो के कारोबार मे ।
खुदा जाने सुकून बिकता कहा है?
सुकून ऐ दिल के लिए कभी हाल तो पूँछ ही लिया करो,
मालूम तो हमें भी है कि हम आपके कुछ नहीं लगते…!
तुम्हारे खयालो में चलते चलते कही फिसल ना जाऊ मैं,
अपनी यादों को रोक, की मेरे शहर में बारिश का मौसम है..
कुछ रीश्ते ‘रब’ बनाता हे कुछ रीश्ते ‘लोग’ बनाते हे
पर कुछ् लोग बीना कीसी रीश्ते के रीश्ते नीभाते हे, शायद वही ‘दोस्त’ कहेलाते हे|
मुहब्बत में यही खौफ क्यों हरदम रहता है…
कही मेरे सिवा किसी और से तो मुहब्बत नहीं उसे…
खुदा का शुक्र है की ख्वाब बना दिये,
वरना तुम्हे देखने की तो हसरत ही रह जाती।
मुझे रुला कर सोना तो तेरी आदत बन गई है,
जिस दिन मेरी आँख ना खुली तुझे निंद से नफरत हो जायेगी|
सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये,
वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है।
घायल किया जब अपनो ने, तो गैरो से क्या गिला करना,
उठाये है खंजर जब अपनो ने, तो जिंदगी की तमन्ना क्या करना।
न रूठ जाओ तुम मेरी वफाओं से,
मै खुद मना लूंगा तुम्हे दुआओं से।
हम भी बडे रहीश थे दिल कि दौलत लूटा बैठे,
किस्मत एेसी पलटी ईश्क के धधे मे आ बैठे।
नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की,
पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की।
हौसला रखो उसे मनाने का,
वो रूठ जाता है इसी बहाने से।
बड़ी मुश्किल से सुलाया है ख़ुद को मैंने..
अपनी आँखों को तेरे ख़्वाब क़ा लालच देकर।
उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की,
हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली।
ऐ शेख़ मेरे पीने का अंदाज़ देख,
अक्सर शराब में आंसू मिला के पीता हूँ।
कहीं फिसल ना जाओ ज़रा संभल के रहना,
मौसम बारिश का भी है और मुहब्बत का भी।
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