Hindi Shayari

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यकीन और दुआ नजर नहीं आते, मगर नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं। अब कौन से मौसम से हम आस लगायें, बरसात में भी याद न जब उनको हम आये। ऐ दिल! मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से, इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा, टूट कर बिखर जायेगा एक दिन अपनों के हाथों, किसने तोड़ा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा। यकीन और दुआ नजर नहीं आते, मगर नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं। मेरी आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है, फिर भी मेरे प्यार पर उसको शक आज भी है, नाव में बैठ कर धोये थे उसने हाथ कभी, पानी में उसकी मेहँदी की महक आज भी है।

उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह, तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ,


उड़ रहा था मेरा दिल भी परिंदों की तरह,
तीर जब लग गई तो कोई भी मरहम न हुआ,
देख लेना था मुझे भी हर सितम की अदा,
ऐ सनम तेरे जैसा मेरा कोई दुश्मन न हुआ.


Pathar Ki Yeh Duniya Jazbat Nahi Samajhti,
Dil Me Hai Jo Woh Bat Nahi Samajhti,
Tanha Toh Chand Bhi Hai Sitaron Ke Beech,
Magar Chand Ka Dard Bewafa Raat Nahi Samajhti.



Tumhari Har Ek Baat Bewfai Ki Kahani Hai,
Lekin
Teri Har Saans Meri Zindagi Ki Nishani Hai,
Tum Aaj Tak Samajh Nahi Sake Mere Pyar Ko,
Isliye Mere Aansoo Bhi Tere Liye Pani Hai.




Chaha tha jise use bhulaya na gaya,
Zakhm dil ka logo se chupaya na gaya,
Bewafai ke baad bhi itna pyar karta hai dil unse,
Ki bewafai ka ilzaam bhi uss par lagaya na gaya.



आज अचानक तेरी याद ने मुझे रुला दिया,
क्या करू तुमने जो मुझे भुला दिया,
न करती वफ़ा न मिलती ये सजा,
शायद मेरी वफ़ा ने ही तुझे बेवफा बना दिया।





घुट घुट कर जीना तो
ज़िन्दग़ी नहीं होती,

नफरत से सर झुकाना
बन्दग़ी नहीं होती,

वो ग़ुनाह माफ़ी के
लायक नहीं है,

जिसमें शामिल कोई
शर्मिन्दग़ी नहीं होती ।


वफ़ा की तलाश करते रहे हम
बेबफाई में अकेले मरते रहे हम,

नहीं मिला दिल से चाहने वाला
खुद से ही बेबजह डरते रहे हम,

लुटाने को हम सब कुछ लुटा देते
मुहब्बत में उन पर मिटते रहे हम,

खुद दुखी हो कर खुश उन को रखा
तन्हाईयों में सांसे भरते रहे हम,

वो बेवफाई हम से करते ही रहे
दिल से उन पर मरते रहे हम|




टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी..
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी….



Kash ke hum unke dil pe raaz karte,
Jo kal tha wohi pyar aaj karte,
Hume gum nahi unki bewafai ka,
Bas Armaan tha ki hum bhi apne pyar pe naaz karte.



Itni bedardi se dil ko mere voh tod degi,
Yeh maloom na tha mujhe akela voh chhor degi,
Aey mere masoom dil tu tanhai se pyar kar le,
Bewafa bhi ab wafa ka saath chhor degi.

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