Hindi Shayari

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यकीन और दुआ नजर नहीं आते, मगर नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं। अब कौन से मौसम से हम आस लगायें, बरसात में भी याद न जब उनको हम आये। ऐ दिल! मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से, इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा, टूट कर बिखर जायेगा एक दिन अपनों के हाथों, किसने तोड़ा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा। यकीन और दुआ नजर नहीं आते, मगर नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं। मेरी आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है, फिर भी मेरे प्यार पर उसको शक आज भी है, नाव में बैठ कर धोये थे उसने हाथ कभी, पानी में उसकी मेहँदी की महक आज भी है।

दो रास्ते जींदगी के दोस्ती और प्यार, एक जाम से भरा दुसरा इल्जाम से।


दो रास्ते जींदगी के दोस्ती और प्यार,
एक जाम से भरा दुसरा इल्जाम से।

ज़िन्दगी ने मर्ज़ का क्या खूब इलाज सुझाया,
वक्त को दवा बताया ख्वाहिशों से परहेज़ बताया।

थोङा ऐतबार करो मुझ पर दोस्त हूँ मैं,
कोई गैर नही मुहब्बत हुई है गुनाह तो नही।

अब जो रूठोगे तोह हार जाउंगी..
मानाने का हुनर भूल चुकी हु।

चलो उसका नही तो खुदा का एहसान लेते हैं,
वो मिन्नत से ना माना तो मन्नत से मांग लेते हैं।

कैसा सितम है आपका ये की रोने भी नही देता,
करीब आते नहीं और खुद से जुदा होने भी नहीं देता।

टूट जायेगी तुम्हारी ज़िद की आदत उस दिन,
जब पता चलेगा की याद करने वाला अब याद बन गया।

मोहब्बत खो गयी मेरी, बेवफ़ाई के दलदल में,
मगर इन पागल आँखो को, आज भी तेरी तलाश रहती है।

उसे कह दो कि वो किसी और से, मुहब्बत कि ना सोचें,
एक हम ही काफी है, उसे उम्र भर चाहने के लिए।

नज़र चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है प्यार करना,
क्या बताएं इस दिलका आलम, नसीब मैं लिखा है इंतज़ार करना।

जिनका मिलना मुकद्दर मे लिखा नही होता..
उनसे मुहबत कसम से कमाल की होती है ।।

तेरे बाद हमने इस दिलका दरवाज़ा खोला ही नही,
“वरना” बहुत से चाँद आये इस घर को सजाने के लिए..

आज़ाद कर दूंगा तुमको अपनी मुहब्बत की क़ैद से,
करे जो हमसे बेहतर तुम्हारी क़दर पहले वो शख्स तो ढूँढो..

आप जब तक रहेंगे आंखों में नजारा बनकर..
रोज आएंगे मेरी दुनिया में उजाला बनकर..

नहीं अब जख़्म कोई ग़हरा चाहिये..
बस तेरी दुआओं का पहरा चाहिये।

जहर से खतरनाक है यह मोहब्बत,
जरा सा कोई चख ले तो मर मर के जीता है!

सारा झगड़ा ही ख्वाहिशो का है,
ना गम चाहिए ना कम चाहिए..!!!

गुमनामी का अँधेरा कुछ इस तरह छा गया है..
की दास्ताँ बन के जीना भी हमे रास आ गया है।

जिसकी वजह से मेंने छोड़ी अपनी साँस..
आज वो ही आके पूछती हे किसकी हे ये लाश।।

मोहब्बत नही थी तो एक बार समझाया तो होता..
बेचारा दिल तुम्हारी खामोशी को इश्क़ समझ बैठा|

तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है,
आखरी सास तक तेरा इंतजार करू!

काश तू बस इतनी सी मोहब्बत निभा दे..
जब मैं रूठूँ तो तू मुझे मना ले…!

बस रिश्ता ही तो टूटा है,
मोहब्बत तो आज भी हमे उनसे है….

रंज़िश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ..
आ फिरसे मुझे छोड़के जानेके लिए आ|

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो..
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है|

कोई ठुकरा दे तो हँसकर जी लेना,
क्यूँकि मोहब्बत की दुनिया में ज़बरजस्ती नहीं होती!

दीवानगी मे कुछ एसा कर जाएंगे..
महोब्बत की सारी हदे पार कर जाएंगे।

तेरी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की,
हम तो बेवजह खुद को खुशनसीब समझने लगे|

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!

यू तो खुश है, जमाना मेरी शोहरत से..
मगर कुछ लोग हैं, जिनका दम निकलता हैं|

तोड़ कर जोड़ लो चाहे हर चीज़ दुनिया की..
सब की मरम्मत मुमकिन है एतबार के सिवा|

बहके बहके ही, अँदाज-ए-बयां होते है..
आप होते है तो, होश कहाँ होते है|

हँसी यूँ ही नहीं आई है इस ख़ामोश चेहरे पर,
कई ज़ख्मों को सीने में दबाकर रख दिया हमने|

मुझसे कहती है तेरे साथ रहूंगी!
बहुत प्यार करती है मुझसे मेरी उदासी !!

इतना ही गुरुर था तो मुकाबला इश्क का करती ऐ बेवफा..
हुस्न पर क्या ईतराना जिसकी ओकात ही बिस्तर तक हौ..।।

मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नही..
चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।

सोजा दिल आज धुँध बहुत है….! तेरे शहर में..! अपने दिखते नही
और जो दिखते है ..! वो अपने नही है…!

नाराज क्यों होते हो चले जायेंगे तुम्हारी जिन्दगी से बहुत दूर,
जरा टूटे हुए दिल के टुकङे तो उठा लेने दो!

खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं,
और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।

लगता है खुदा मुझे बुलाने वाला है,
रोज़ मेरी झूटी कसमे खा रही है वो|

Ye kaisa silsila hai tere aur mere darmiyaan,
Faasle toh bahot hain magar mohabbat kam nahi hoti.

Ek tujhko hi chaaha tha, zamaane se ladkar,
Tumne zamaane se milkar, mujhe hi tanhaa kar diya.

Aie shekh mere peene ka andaz dekh,
Aksar sharab me aansu mila ke peeta hoon.

Kahin fisal na jao zara sambhal ke rehna,
Mausam baarish ka bhi hai aur mohabbat ka bhi.

Mere hi hathon pe likhi hai taqdeer meri,
Aur meri hi taqdeer par mera bus nahi chalta.

Tujhe pa na sake toh bhi saari zindagi tujhe pyar karenge,
Ye zaruri toh nahi jo mil na sake usse chhor diya jaye.

Zindagi mein Yeh Hunar Bhi Aazmaana chahiye,
Apnon se agar ho Jung toh haar Jaana chahiye.

Hum roj udas hote hai or shaam guzar jaati hai,
Ek roj shaam bi udas hogi or hum guzar jayenge.

Uski bewafai pe bhi fida hoti hai jaan apni,
Khuda jane agar us mein wafa hoti to kya hota.

Bas ek tujhe hi yakeen nahi mere jazbaaton par,
Warna kitne hi deewane ban bethe meri mohabbat ki dastan sun kar.

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