वो कह कर गई थी कि लौटकर आऊँगी,
मैं इंतजार ना करता तो क्या करता,
वो झूठ भी बोल रही थी बड़े सलीके से,
मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता।
हमारी ज़िंदगी तो कब की बिखर गयी,
हसरते सारी दिल में ही मर गयी,
चल पड़ी वो जब से बैठ के डोली में,
हमारी तो जीने की तमन्ना ही मर गयी।
कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी।
आज किसी की दुआ की कमी है,
तभी तो हमारी आँखों में नमी है,
कोई तो है जो भूल गया हमें,
पर हमारे दिल में उसकी जगह वही है।
छूट गया जो साथ तेरा मुझसे,
रूठ गया है अपना ही दिल मुझसे,
कितनी तकलीफ कितना दर्द है तेरे जाने का,
एक बार मुड़ के देख क्या हल हो गया है तेरे दीवाने।
आज तक है उसके लौट आने की उम्मीद,
आज तक ठहरी है ज़िंदगी अपनी जगह,
लाख ये चाहा कि उसे भूल जाये पर,
हौंसले अपनी जगह बेबसी अपनी जगह।
आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए,
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए,
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो,
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए।
तुम क्या जानो क्या है तन्हाई,
टूटे हर पत्ते से पूछो क्या है जुदाई,
यूँ बेवफ़ाई का इल्ज़ाम ना दे ए-ज़ालिम,
इस वक़्त से पूछ किस वक़्त तेरी याद ना आई।
दिल टूटेगा तो फरियाद करोगे तुम भी,
हम न रहे तो हमने याद करोगे तुम भी,
आज कहते हो हमारे पास वक़्त नहीं हैं,
पर एक दिन मेरे लिए वक़्त बर्बाद करोगे तुम भी।
आज तक है उसके लौट आने की उम्मीद,
आज तक ठहरी है ज़िंदगी अपनी जगह,
लाख ये चाहा कि उसे भूल जाये पर,
हौंसले अपनी जगह बेबसी अपनी जगह।
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