लिखी है खुदा ने मोहब्बत सबकी तक़दीर में,
हमारी बारी आई तो स्याही ही ख़त्म हो गई।
तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा….
मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती..
रिवाज तो यही हे दुनिया का मिल जाना और बिछड जाना,
तुम से ये कैसा रिश्ता है ना मिलते हो ना बिछडते हो|
तेरा ख़याल दिल से मिटाया नहीं अभी,…
बेदर्द मैं ने तुझ को भुलाया नहीं अभी
अपने अहम् को थोड़ा-सा झुका के चलिये…
सब अपने लगेंगे ज़रा-सा मुस्कुरा के चलिये…!!
ज़रूरत दिन निकलते ही निकल पड़ती है डयूटी पर,
बदन हर शाम ये कहता है, अब हड़ताल हो जाए…!
अखबार के किसी भी पन्ने में तुमहरा जिक्र तक नही
लोग यूँ ही कहते है दुनियाँ भर की ख़बरे आती हैं इसमे
दुल्हन बनी हुई हैं आँखें उसकी,
यक़ीनन रात भर रोई है वो
रहम को रहम न आया मुझ पर,
ढोती रही गम का बोरा पीठ पर…!
सब आते है खैरियत पूछने
तुम आ जाओ तो ये नौबत ही न आए..
मेरे शेर भी इनको बयाँ नहीं करते
कुछ राज़ दिल के बहुत ख़ास होते हैं
वोह मुझसे दूर होकर खुश हैं तो खुश रहने दो उसे,
मुझे अपनी चाहत से ज़्यादा, उसकी मुस्कुराहट पसंद है….!
शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी पर चुप इसलिये हु कि
जो दिया तूने वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता
जग रूठे तो कहां परवाह है मुझे…
मगर मर जाऊंगाी मै जो आंख तुने फेरी…
कभी तो खर्च कर दिया करो खुद को मुझ पर,
तसल्ली रहे कि मामूली हम भी नहीं हैं
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