तेरी नियत ही नहीं थी साथ चलने की,
वरना निभाने वाले रास्ता देखा नहीं करते।
कौन कहता है हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत पूछ के तो देखिये।
शौक से बदलो मगर इतना याद रखना
अगर हम बदले तो करवट बदलते रह जाओऊगे।
उस से नफ़रत करता तो उसकी अहमियत बढ़ जाती,
मैंने माफ़ करके उसको, शर्मिंदा कर दिया।
लाखो अदाओ की अब जरुरत ही क्या है
जब वो फिदा ही हमारी सादगी पर है।
हद करते हो यार तुम भी,
इतना प्यार वो भी सबके सामने।
टुकड़े पड़े थे राह में किसी हसीना की तस्वीर के,
लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया।
मोहब्बत करने की बात हो तो किसी से भी कर लेंगे,
मगर जो मोहब्बत होने की बात है वो तो बस तुमसे है।
थोड़ा तो ऐतबार किया होता तूने मुझपर,
मुहब्बत की है तुमसे.. कोई फरेबी नहीं।
बेशक तू बदल ले अपने आप को लेकिन ये याद रखना
तेरे हर झूठ को मेरे सिवा कोई समझ नहीं सकता।
ना पेशी होगी.. ना गवाह होगा,
जो भी उलझेगा मोहब्बत से.. वो सिर्फ तबाह होगा।
कुछ शिकायतें बनी रहें रिश्तों में तो अच्छा है,
चाशनी मे डूबे रिश्ते अक्सर वफादार नहीं होते।
हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गये,
हम समंदर से भी गहरे हो गये।
बस इबादत में कमी है ज़नाब,
वरना ख़ुदा तो हर जग़ह मौजूद है।
हुस्न वाले वफ़ा नहीं करते, इश्क वाले दगा नहीं करते,
जुल्म करना तो इनकी आदत है, ये किसी का भला नहीं करते।
हम आज भी शतरंज़ का खेलअकेले ही खेलते हे,
क्युकी दोस्तों के खिलाफ चालचलना हमे आता नही।
सज़दे कीजिये, या माँगिये दुआयें,
जो आपका है ही नही, वो आपका होगा भी नही।
फूल यूँ ही नही खिल जाते साहब,
बीज को दफन होना पड़ता है।
जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए,
अंदाज बदल के बोलने से भी बहोत कुछ टूट जाता है।
उनकी चाल ही काफी थी इस दिल के होश उड़ाने के लिए,
अब तो हद हो गई जब से वो पाँव में पायल पहनने लगे।
गुफ्तगू करते रहिये थोड़ी थोड़ी सभी दोस्तो से,
जाले लग जाते है अक्सर बंद मकानों में भी।
बहुत ही आसान है जमीं पे आलीशान मकानों का बना लेना,
दिल में जगह बनाने में जिन्दगी गुजर जाया करती है।
मुझे तो आदत है तुम्हें याद करने की,
अगर हिचकियाँ आएँ तो माफ़ करना।
बेचैनियां बाजार में, नहीं मिला करती यारों,
बाँटने वाला, कोई बहुत नज़दीकी होता है।
दुनिया में सब से ज्यादा वजनदार,
खाली जेब होती है साहेब, चलना मुश्किल हो जाता है।
रूबरू आपसे मिलने का मौका रोज नहीं मिलता,
इसलिए शब्दों से आप सब को छू लेता हूँ।
बड़ी आरूजु थी महबुब को बेनकाब देखें,
दुपट्टा जो सरका तो जुल्फें दीवार बन गई।
उस शक्श से फ़क़त इतना सा ताल्लुक है मेरा,
वो परेशान होता है तो मुझे नींद नही आती है।
राख होता हुआ वजूद मुझसे थक कर सवाल करता है,
मोहब्बत करना तेरे लिए इतना ही जरुरी था क्या।
इससे बढ़कर और क्या सितम होगा खुदा,
वो चाहते भी है और कहते भी नहीं।
धड़कनों को भी रास्ता दे दीजिये हुजूर,
आप तो पूरे दिल पर कब्जा किये बैठे है।
ना मिल रहा है तु, ना खो रहा है तु,
ऐ मेरे यार, बडा दिलचस्प हो रहा है तु।
हम से बड़े और भी दावेदार हैं तुम्हारे,
पर हमारे जैसा जुनून लाएंगे कहां से।
पंख लगा के उड नहीं सकती चिट्ठी मेरी क्योंकि,
एहसास और अल्फाज दोनों ही बहुत भारी है इसमें।
तुम चाहे बंद कर लो दिल के दरवाजे सारे,
हम दिल मे उतर आएंगे, कलम के सहारे।
ज़ख्म ताज़ा हो तो रुक रुक के कसक होती है,
याद गहरी हो तो थम थम के क़रार आता है।
उदास कर गई आज की सुबह भी मुझे..
जैसे भुला रहा हो कोई आहिस्ता-आहिस्ता।
बिगाड़ के रख देती है ज़िन्दगी का चेहरा,
ए-मोहबत.. तू बड़ी तेजाबी चीज़ है।
उम्र भर चलते रहे, मगर कंधो पे आए कब्र तक,
बस कुछ कदम के वास्ते गैरों का अहसान हो गया।
खयालों में उसके मैंने बिता दी ज़िंदगी सारी,
इबादत कर नहीं पाया खुदा नाराज़ मत होना।
मेरी नीम सी जिंदगी को शहद कर दे,
कोई मुझे इतना चाहे की बस हद्द कर दे।
अब कोई दर्द दर्द नहीं लगता,
तेरे दिए हुए दर्द ने तो कमाल कर दिया।
ख्वाहिश थी उस रिश्ते को बचाने की,
और यही वजह थी मेरे हार जाने की।
बस इबादत में कमी है ज़नाब,
वरना ख़ुदा तो हर जग़ह मौजूद है।
सिर्फ दो ही वक़्त पर तेरा साथ चाहिए,
एक तो अभी और एक आने वाले कल मे।
सवाल ये नहीं रफ्तार किसकी कितनी है,
सवाल ये है सलीक़े से कौन चलता है।
तुम्हें तो इल्म है मेरे दिल-ए-वहशी के ज़ख़्मों को,
तुम्हारा वस्ल मरहम है कभी मिलने चले आओ।
जब दिल करता है कुछ करू,
तो तुम्हारे लिए दुआ कर देता हूँ!!
इक खिलौना टूट जाएगा नया मिल जाएगा,
मैं नहीं तो कोई तुझको दूसरा मिल जाएगा।
अपने वो नही होते जो तस्वीर में साथ खड़े होते हैं,
अपने वो हैं जो तकलीफ में साथ खड़े होते हैं।
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