Hindi Shayari

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यकीन और दुआ नजर नहीं आते, मगर नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं। अब कौन से मौसम से हम आस लगायें, बरसात में भी याद न जब उनको हम आये। ऐ दिल! मत कर इतनी मोहब्बत तू किसी से, इश्क़ में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा, टूट कर बिखर जायेगा एक दिन अपनों के हाथों, किसने तोड़ा ये भी किसी से कह नहीं पायेगा। यकीन और दुआ नजर नहीं आते, मगर नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं। मेरी आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है, फिर भी मेरे प्यार पर उसको शक आज भी है, नाव में बैठ कर धोये थे उसने हाथ कभी, पानी में उसकी मेहँदी की महक आज भी है।

ग़म सलीक़े में थे, जब तक हम ख़ामोश थे, ज़रा ज़ुबां क्या खुली, दर्द बे-अदब हो गए।


किसी के काम न जो आए वह आदमी क्या है,
जो अपनी ही फिक्र में गुजरे, वह जिन्दगी क्या है।

कितना और बदलूं खुद को जिंदगी जीने के लिए,
ऐ जिंदगी, मुझको थोडा सा मुझमे बाकी रहने दे।

सबके कर्ज़े चुका दूँ मरने से पहले, ऐसी मेरी नीयत है,
मौत से पहले तू भी बता दे ज़िंदगी, तेरी क्या कीमत है।

तुने तो रुला के रख दिया ए-जिन्दगी​,
जा कर पूछ मेरी माँ से ​ कितने लाडले थे हम।

नही चाहिए हमें ओर कुछ भी..
अगर, किस्मत मुझे तुम्हारा साथ दें दे।

मुस्कुराते रहोगे तो दुनिया आपके क़दमों में होगी,
वरना आंसुओं को तो तो आँखें भी जगह नहीं देती।

कभी तो मेरे प्यार को समझ लो..
एक दिन तुम्हे क्या मै पूरी दुनिया को छोड जाउंगा।

तुने तो रुला के रख दिया ए-जिन्दगी​,
जा कर पूछ मेरी माँ से ​ कितने लाडले थे हम।

फिक्र है सब को खुद को सही साबित करने की,
जैसे ये जिन्दगी, जिन्दगी नही, कोई इल्जाम है!!

सौ बार मरना चाहा उनकी निगाहों में डूब के,
वो हर बार निगाहें झुका लेते हैं, मरने भी नहीं देते हैं।

कीमती हैं सिक्के, ईमान सस्ता है,
यहां रिश्तों का मतलब ही, मतलब का रिश्ता है।

शोर करते रहो तुम सुर्ख़ियों में आने का,
हमारी तो खामोशियाँ भी एक अखबार हैं।

थक सी जाती है ज़िन्दगी.. जब
कोई सनम हद से ज़्यादा ‘याद’ आने लगे।

मजबूत होने में मज़ा ही तब है,
जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो।

बहुत चुपके से दिया था, उसने गुलाब हमें,
कमबख़्त खुशबू ने, कोहराम मचा दिया।

दिल से बड़ी कोई क़ब्र नहीं है,
रोज़ कोई ना कोई एहसास दफ़न होता है।

भूली बिसरी सभी यादें जला जाऊंगा,
थोड़ा दर्द थम जाने दो, मैं चला जाऊंगा।

यूँ ना छोड़ जिंदगी की किताब को खुला,
बेवक्त की हवा ना जाने कौन सा पन्ना पलट दे।

ज़िन्दगी है चार दिन की, कुछ भी न गिला कीजिये,
दवा, ज़हर, जाम, इश्क, जो मिले मज़ा लीजिये।

खुदा न बदल सका आदमी को आज भी यारों,
और अब तक आदमी ने सैकड़ो खुदा बदल डाले।

कब आ रहे हो मुलाकात के लिये,
हमने चाँद रोका है एक रात के लिये।

ताश के पत्ते खुशनसीब हैं यारों,
बिखरने के बाद कोई उठाने वाला तो है।

जरूरी नही कि हम सबको पसंद आए,
बस, जिंदगी ऐसे जीओ कि रब को पसंद आए।

मुझपे हंसने की ज़माने को सजा दी जाये,
मैं बहुत खुश हूँ ये अफवाह उड़ा दी जाये।

ख़ुद भी शामिल नहीं जिंदगी के सफ़र में,
पर लोग कहते हैं कि पूरा क़ाफ़िला हूँ मैं।

आईना फैला रहा है ख़ुद, फ़रेब का ये मर्ज़,
हर किसी से कह रहा है, आप सा कोई नही।

कुछ लोग मेरी दुनिया में खुशबू की तरह है,
रोज़ महसूस तो होते पर दिखाई नही देते।

सिर्फ़ दो ही गवाह थे मेरी वफ़ा के, एक वक्त,
और एक वो, एक गुज़र गया और एक मुकर गया।

रुबरु मिलने का मौका नही मिलता,
इसीलिए, शब्दो से नमन कर लेता हूँ अपनो को।

जब ख्वाबों के रास्ते जरूरतों की और मुड जाते है,
तब हमें असल जिंदगी के मायने समझ में आते है।

मन ख्वाईशो मे अटका रहा,
और जिंदगी हमे जी कर चली गई।

मुझे महँगे तोहफ़े बहुत पसंद है,
अगली बार यूं करना, ज़रा सा वक़्त ले आना।

मत तोला कर इबादत को अपने हिसाब से,
रहमतें उसकी देखकर, अक्सर तराज़ू टूट जाते हैं।

वहम था कि सारा बाग अपना है तूफां के बाद,
पता चला सूखे पत्तों पर भी हक हवाओं का था।

हमारी आँखों पर भरोसा कीजिये,
जनाब, गवाही तो अदालतें माँगा करती है।

फ़लसफी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं,
डोर को सुलझा रहा है और सिरा मिलता नहीं।

मेरे बिना रह ही जायेगी कोई न कोई कमी,
तुम जिंदगी को जितनी मरजी सँवार लेना।

दोस्तो से बडी कोई दौलत नही,
इस मामले में मुझ से बड़ा कोई अमीर नहीं।

माना कि दो किनारो का कही संगम नही होता,
मगर साथ चलना भी तो कम नहीं होता।

जिनके उपर जिम्मेदारीयों का बोझ होता है,
उनको रुठने और टूटने का हक़ नही होता।

लगाई तो थी आग उसकी तस्वीर में रात को,
सुबह देखा तो मेरा दिल छालों से भरा पड़ा था।

कोई कितना ही खुश-मिज़ाज क्यों न हो
रुला देती है किसी की कमी कभी-कभी।

नुमाइश करने से चाहत नही बढ़ जाती,
मुहब्बत वो भी करते है जो इजहार तक नही करते।

वो किताब लौटाने का बहाना तो लाखों में था,
लोग ढुँढते रहें सबूत, पैग़ाम तो आँखों मे था।

ग़म सलीक़े में थे, जब तक हम ख़ामोश थे,
ज़रा ज़ुबां क्या खुली, दर्द बे-अदब हो गए।

आंखे बंद होने से पहले, यदि आंखे खुल जाए,
दावे के साथ कहता हूँ, पूरी ज़िंदगी सुधर जाए।

तहजीब देखता हूं, मै अक्सर गरीबो के घर मे,
दुपट्टा फटा होता है, लेकिन सर पर होता है।

आँखों की झील से दो कतरे क्या निकल पड़े,
मेरे सारे दुश्मन एकदम खुशी से उछल पडे़।

दोस्ती कभी-कभी ऐसे भी निभानी चाहिये,
कुछ बातें बिन कहे भी समझ जानी चाहिये।

यूँ चेहरे पर उदासी ना ओढिये साहब,
वक़्त ज़रूर तकलीफ का है लेकिन कटेगा मुस्कुराने से ही।

आओ आज महफ़िल सजाते हैं,
तुम्हें लिखकर, तुम्हें ही सुनाते हैं।

नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यू नही,
इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यू नही।

रास्ते जुदा होने से अहसास मिटा नहीँ करते,
हमतब भी महकेंगे जब मौसम पतझड़ के होंगे।

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम,
ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम।

मत पहनाओ इन्हें.. शर्तों का लिबास,
रिश्ते तो.. बिंदास ही अच्छे लगते हैं।

प्यास तो मर कर भी नहीं बुझती ज़माने की,
मुर्दे भी जाते जाते गंगाजल का घूँट मांगते है।

तलब में शुमार इस कदर दीदार उनका,
सौ बार भी मिल जाये अधूरा लगता है।

तुम्हारा सिर्फ हवाओं पे शक़ गया होगा,
चिराग़ खुद भी तो जल-जल के थक गया होगा।

बड़ी तब्दीलिया लाया हूँ अपने आप मे लेकिन,
बस तुमको याद करने की वो आदत अब भी है।

नाम तेरा ऐसे लिख चुके है अपने वजूद पर,
कि तेरे नाम का भी कोई मिल जाए.. तो भी दिल धड़क जाता है।


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