दो कश मोहब्बत के क्या लिये,
जिंदगी ही धुँआ धुँआ हो गई।
यादें बनकर जो रहते हो साथ मेरे..
तेरे इतने अहसान का सौ बार शुक्रिया।
शायरी समझते हो जिसे तुम सब,
वो मेरी किसी से अधूरी मुलाकात है।
तुने तो रुला के रख दिया ए-जिन्दगी,
जा कर पूछ मेरी माँ से कितने लाडले थे हम।
प्यार करना सिखा है नफरतो का कोई ठौर नही,
बस तु ही तु है इस दिल मे दूसरा कोई और नही।
पास आने की ख्वाइशें तो बहुत थी मगर,
पास आकर पता चला मोहब्बत फासलों में है।
सब कुछ वैसा ही है कुछ नही बदला,
बदला है तो बस नजरिया एक दूसरे को देखने का।
तेरे लहजे में लाख मिठास सही मगर,
मुझे जहर लगता है तेरा औरों से बात करना।
तुम्हें पा लेते तो किस्सा इसी जन्म में खत्म हो जाता,
तुम्हे खोया है तो, यकीनन कहानी लम्बी चलेगी।
खुद हैरान हूँ मैं, अपने सब्र का, पैमाना देख कर,
तूने कभी याद ना किया, और मैंने कभी इन्तजार नहीं छोड़ा।
झूठ कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है,
सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं।
उदासियों की वजह तो बहुत है जिंदगी में,
पर बेवजह खुश रहने का मजा ही कुछ और है।
कौन कहता है क़ि चाँद तारे तोड़ लाना ज़रूरी है,
दिल को छू जाए प्यार से दो लफ्ज़, वही काफ़ी है।
तुम्हें पा लेते तो किस्सा इसी जन्म में खत्म हो जाता,
तुम्हे खोया है तो, यकीनन कहानी लम्बी चलेगी।
वो मुझसे पूछती है दूर जाकर खुश तो हो ना,
आँखें पोंछकर कहता हूँ हाँ बहुत खुश हूँ मैं।
कोई मुक़दमा ही कर दो हमारे सनम पर,
कम से कम हर पेशी पर दीदार तो हो जायेगा।
सीतम तो ये है की पगली तु भी ना बन सकी अपनी,
जा कुबूल किया हमने तेरा ये गम भी ख़ुशी की तरह।
मुस्कुराना तो मेरी शख्सियत का एक हिस्सा है दोस्तों,
तुम मुझे खुश समझ कर दुआओ में भूल मत जाना।
दरख्तों से ताल्लुक का हुनर सीख ले इंसान,
जड़ों में ज़ख्म लगते हैं तो टहनियाँ सूख जाती हैं।
इक टूटी सी ज़िन्दगी को समेटने की चाहत थी,
न खबर थी उन टुकड़ों को ही बिखेरे बैठेंगे हम।
देखता रहता हूँ हाथों की लकीरों को..
दिन रात, यार का दीदार कहीं लिखा हो शायद।
बातें तो हम भी उनसे बहुत करना चाहते है,
पर ना जाने क्यूँ वो हमसे मुँह छुपाये बैठे है।
सो गई है शहर की सारी गलिया,
अब जागने की बारी मेरी है।
तेरे सिवा कौन समा सकता है मेरे दिल में,
रूह भी गिरवी रख दी है मैंने तेरी चाहत में।
धड़कनों को भी रास्ता दे दीजिये हुजूर,
आप तो पूरे दिल पर कब्जा किये बैठे है।
लत तेरी ही लगी है.. नशा सरेआम होगा,
हर लम्हा.. मेरे इश्क का, सिर्फ तेरे नाम होगा।
अब मेरा हाल चाल नहीं पूछते हो तो क्या हुआ,
कल एक एक से पूछोगे की उसे हुआ क्या था.
कह दो उससे जुदाई अज़ीज़ है तो रूठ जाये हमसे,
वो हमारे बिन जी सकता है तो हम भी मर नहीं जायेंगे।
मोहब्बत किससे और कब हो जाये..
अदांजा नहीं होता, ये वो घर है जिसका दरवाजा नहीं होता।
उनकी चाल ही काफी थी इस दिल के होश उड़ाने के लिए,
अब तो हद हो गई जब से वो पाँव में पायल पहनने लगे।
ना रोक कलम मुझे दर्द लिखने दे,
आज तो दर्द रोयेगा या फिर दर्द देने वाला।
रूबरू तो देखा नही तुम्हे, बस महसूस किया है,
इन्ही खूबसूरत ख्यालो से, बेहपना मोहब्बत है हमे।
मुस्कुराहट एक कमाल की पहेली है,
जितना बताती है, उससे कहीं ज्यादा छुपाती हैं।
हमे मालूम था अपनी दिल्लगी का नतीजा,
तभी मोहब्बत से पहले शायरी सीखी है हमने।
कुछ रिश्ते अजीब होते हैं, आलम तो देखिए,
जोड़े भी नहीं जाते, तोड़े भी नहीं जाते।
इंतजार तो बस उस दिन का है,
जिस दिन तुम्हारे नाम के पीछे हमारा नाम लगेगा।
ज़्यादा कुछ नहीं बदला उसके और मेरे,
बीच में पहले नफरत नहीं थी और अब प्यार नहीं है।
लग रहा है भूल गए हो शायद,
या फ़िर कमाल का सब्र रखते हो।
ज़िन्दगी है चार दिन की, कुछ भी न गिला कीजिये
दवा, ज़हर, जाम, इश्क, जो मिले मज़ा लीजिये।
जिस फूलों की परवरिश हमने अपनी मोहब्बत से की,
जब वो खुशबू के काबिल हुए तो औरों के लिए महकने लगे।
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