तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलकों पर,
जब भीग कर कहती है की अब रोया नहीं जाता।
तारे और इंसान में कोई फर्क नहीं होता,
दोनो ही किसी की ख़ुशी के लिऐ खुद को तोड़ लेते हैं।
कुछ यूँ उतर गए हो मेरी रग-रग में तुम,
कि खुद से पहले एहसास तुम्हारा होता है।
नहीं ‘मालूम ‘हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है,
बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।
बात वफ़ाओ की होती, तो कभी न हारते,
बात नसीब की थी, कुछ ना कर सके।
हर पल में प्यार है हर लम्हे में ख़ुशी है,
खो दो तो याद है जी लो तो ज़िन्दगी है।
बहुत दूर है तुम्हारे घर से हमारे घर का किनारा,
पर हम हवा के हर झोंके से पूछ लेते हैं क्या हाल है तुम्हारा।
निगाहें नाज करती है फलक के आशियाने से,
खुदा भी रूठ जाता है किसी का दिल दुखाने से।
अपनी रातें उनके लिए ख़राब करना छोड़ दो दोस्तों,
जिनको ये भी परवाह नहीं की तुम सुबह उठोगे भी या नहीं।
यूं तो तेरी महफिल में हमे चाहने वालो की कमी नहीं,
पर हम तुझे चाहने में कोई खता करें ये भी तो हमें गवारा नही।
चलो फ़िर से हौले से मुस्कुराते हैं,
बिना माचिस के ही लोगों को जलाते हैं।
भरोसा क्या करना गैरों पर,
जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।
ये सर्द शामें भी किस कदर ज़ालिम है,
बहुत सर्द होती है, मगर इनमें दिल सुलगता है।
तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब,
कि सारी उम्र हम अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे।
उसकी आंखे इतनी गहरी थी की,
तैरना तो आता था मगर डूब जाना अच्छा लगा।
खोजती है निग़ाहें उस चेहरे को,
याद में जिसकी सुबह हो जाती है।
चलो हो गयी रात अब फिर,
दिल के किसी कोने में उसकी याद उमड़ आएगी।
खेलना अच्छा नहीं किसी के नाज़ुक दिल से,
दर्द जान जाओगे जब कोई खेलेगा तुम्हारे दिल से।
ऐ चाँद चला जा क्यूँ आया है तू मेरी चौखट पर,
छोड़ गया वो शख्स जिस के धोखे मे तुझे देखते थे।
ये नज़र चुराने की आदत आज भी नहीं बदली उनकी,
कभी मेरे लिए ज़माने से और अब ज़माने के लिए हमसे।
ज़माने में बस ये दो हादसे नही होते,
हम तुमसे जुदा, तुम हमारे नही होते।
क़लम जब तुमको लिखती है,
दख़ल-अंदाजी फ़िर हम नहीं करते।
तेरी याद में मेरी कलम भी रो पड़ी तू ही बता,
मैं कैसे कह दूं कि मुझे तुझसे मोहब्बत नहीं।
खुश हूँ कि मुझको जला के तुम हँसे तो सही,
मेरे न सही किसी के दिल में बसे तो सही।
नहीं फुर्सत यकीं मानो हमें कुछ और करने की,
तेरी यादें, तेरी बातें बहुत मसरूफ़ रखती है।
मुझे भी पता है कि तुम मेरी नहीं हो,
इस बात का बार बार एहसास मत दिलाया करों।
रब ना करें इश्क़ की कमी किसी को सताए,
प्यार करो उसी से जो तुम्हें, दिल की हर बात बताये।
कोई मजबूरी होगी जो वो याद नहीं करते,
सम्भल जा ऐ दिल तुझे तो रोने का बहाना चाहिए।
तुझे बर्बाद कर दूँगी, अभी भी लौट जा वापिस,
मोहब्बत नाम है मेरा मुझे क़ातिल भी कहते हैं।
महफ़िल में कई शायर है तो सुनाओ,
हमे वो शायरी जो दिल के आर पार हो जाये।
जिसका ये ऐलान है कि वो मज़े में है,
या तो वो फ़कीर है या फिर नशे में है।
इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे,
तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं।
एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये,
पर ये कम्ब्खत दिल कभी उनसे रूठा ही नही।
अधूरा ही रह जाता है हर अल्फाज,
मेरी शायरी का तेरे अहसास की खुश्बू के बिना।
कभी मैं तो कभी ये बात बदल रही है,
कमबख्त नींद से मेरी लड़ाई चल रही है।
दिल अधूरी सी कहानियों का अंत ढूंढता रहा,
और वो कोरा पन्ना मुझे देर तक घूरता रहा।
टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्र भर,
चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में।
जिस्म से रूह तक जाए तो हकीकत है इश्क,
और रूह से रूह तक जाए तो इबादत है इश्क़।
दोष कांटो का कहाँ हमारा है जनाब,
पैर हमने रखा वो तो अपनी जगह पे थे।
ये इश्क है जनाब यहा इंसान निखरता भी,
कमाल का है और बिखरता भी कमाल का है।
कितने ही दिल तोड़ती है ये फरवरी,
यूं ही नही बनाने वाले ने इसके दिन घटाये होंगे।
हाल यह है के तेरी याद में गम हूँ,
सब को मेरी और मझे को तेरी पड़ी रहती है।
सच कहू तो में आज भी इस सोच में गुम हूँ,
में तुम्हे जीत तो सकता था जाने हरा क्यों।
हाथ पर हाथ रखा उसने तो मालुम हुआ,
अनकही बात को किस तरह सुना जाता है।
जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी मिलते है,
जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं।
आज बता रहा हूँ नुस्खा-ए-मौहब्बत ज़रा गौर से सुनो,
न चाहत को हद से बढ़ाओ न इश्क़ को सर पे चढ़ाओ।
जिन्हें सांसो की महक से इश्क महसूस ना हो,
वो गुलाब देने भर से हाल-ए-दिल को क्या समझेंगे।
बड़ी ख़ामोशी से गुज़र जाते हैं हम एक दूसरे के करीब से,
फिर भी कमबख्त दिलों का शोर सुनाई दे ही जाता है।
फूँक डालूँगा किसी रोज़ ये दिल की दुनिया,
ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ।
अगर नींद आ जाये तो सो भी लिया करो,
रातों को जगने से मोहब्बत लोटा नहीं करती।
मौत ने आँखें मिलाई थी कई बार मुझसे,
पर तेरा दीवाना किसी और पे मरता कैसे।
थक गया है चाहतों का वजुद अब कोई,
अच्छा भी लगे तो हम इजहार नही करते।
पहले सौ बार कभी इधर कभी उधर देखा है,
तब कहीं डर के तुझे एक नज़र देखा है।
उम्र छोटी है तो क्या ज़िंदगी का हरेक मंज़र देखा है,
फरेबी मुस्कुराहटें देखी हैं बगल में खंजर देखा।
गलत सुना था कि मोहब्बत आँखों से होती है,
दिल तो वो भी चुरा लेते हैं जो पलकें नहीं उठाते।
मत खाओ कसमे सारी ज़िन्दगी साथ निभाने की,
हम ने साँसो को भी जुदा होते देखा है।
जो मशहूर हुए सिर्फ उन्होंने ही तो मोहब्बत नहीं की
कुछ लोग चुपचाप भी तो क़त्ल हुए है मोहब्बत के हाथोँ।
नींद भी नीलाम हो जाती हैं दिलों की महफ़िल में जनाब,
किसी को भूल कर सो जाना इतना आसान नहीं होता।
हमें भी आते है अंदाज़ दिल तोड़ने के,
हर दिल में ख़ुदा बसता है यही सोचकर चुप हूँ।
मंजिल का नाराज होना भी जायज था,
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे।
रात भर तारीफ करता रहा तेरी चाँद से,
चाँद इतना जला कि सुबह तक सूरज हो गया।
तुम और तुम्हारी हर बात मेरे लिए ख़ास हैं,
यहीं शायद मोहब्बत का पहला अहसास हैं।
मिट जाते है वो औरों को मिटाने वाले,
लाश कहा रोती है रोते हैं जलाने वाले।
दिल टूटा है सम्भलने में कुछ वक्त तो लगेगा साहिब,
हर चीज़ इश्क़ तो नहीं कि एक पल में हो जाये।
दिल टूटा है सम्भलने में कुछ वक्त तो लगेगा साहिब,
हर चीज़ इश्क़ तो नहीं कि एक पल में हो जाये।
हर रिश्ते मे सिर्फ नूर बरसेगा..
शर्त बस इतनी है कि रिश्ते में शरारतें करो साजिशें नहीं।
मैं ना जानू इबादत, मुझे माफ़ कर देना ऐ मेरे खुदा,
मैं तो तेरे दर पे आता हूँ, उसकी गली से गुजरने के लिए।
ख्वाब, ख्याल, मोहब्बत, हक़ीक़त, गम और तन्हाई,
ज़रा सी उम्र मेरी.. किस-किस के साथ गुज़र गयी।
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