मोहब्बत छोड़ तो दी उसने मगर पहचान इतनी
बाकी है…
जब भी मिलता है निगाहें फेर लेता है...
मैने कभी अपनी चाहत का वज़न नहीं देखा
जब किसी ने पूछा दोनो हाथ फैला दिये इतना…
काश ज़िन्दगी ऐसा एक सवाल बन जाए
जिसका कोई न कोई हल निकल आये…
कह गयी मुझसे उनकी वो जुंबिशे नज़र
ब़ाकी जो ईश्क था अब खत्म हो गया…
रिवाज़ न हो भले ही पढी किताबें पढने का
जिंदगी के सीखे सबक रोज़ याद करने होते है
देखना मैं एक दिन चली जाउंगी
तुम्हारे लिए लफ्ज़ छोड़ जाउंगी
जो गिले शिकवे है आज कर लो
कल बहुत दूर निकल जाउंगी…
मोहब्बत यूँ ही किसी से हुआ नहीं करती
खुद को भूलना होता है किसी को अपना बनाने के लिए…
मेरे दिल का वही कोना जागता रहता है
जहां तेरी यादों का सफर साथ रहता है.
यादों की कतरन जोड़ कर मैं आंचल बुन रही हूं
वक्त का रेशम धागा लेकर इक इक लम्हा चुन रही हूं
शहर है हादसों का, यहां सब सपनों में जिया करते हैं
बस ख़ुद की खुशी की लिये सबको थोड़ा थोड़ा सा मार दिया करते हैं.
तूने खतों में जो रोशनाई इस्तेमाल की
वो आज तक मेरे दिल में चमकती है…
मैने जब भी चाहा कि हाले दिल कहूं तुझसे
तू किसी और की बातों में ही उलझा मिला..
दुनियादारी की रस्मों से कुछ यूं जकड़े बैठे हैं~
पकडाई थी उंगली जिनको वो पहुंचा पकड़े बैठे है~
इस क़दर अजनबीपन अपने ही घर में लगा
जो भी अकेला मिला अपना सा लगने लगा..
थकन जिंदगी की और गहरी लग रही है
जाने क्यूं सांस कुछ ठहरी लग रही है
पिया तो है ज़हर मैने अमृत समझ कर
तासीर भी उसकी अब उल्टी लग रही है
बनाये थे दोस्त राह आसान करने को
ख़फा हुये वो किस्मत असर कर रही है…
कह गयी मुझसे उनकी वो जुंबिशे नज़र
ब़ाकी जो ईश्क था अब खत्म हो गया…
मेरी तन्हाइयो से न डर ए दोस्त
हम जहाँ जाते है तुम्हें दिल में ले जाते है…
मिलूंगी एक रोज़ ज़िन्दगी तुझसे वादा है मेरा,
पहले ये रोज़ रोज़ की उलझने सुलझा तो दूँ…
मुझसे जां बचाने के बहाने न तलाश कर…
कोई और न मिलेगा हम सा… हमें छोड़ कर…
शाम होते ही तुम अपना गम भूलने की कोशिश करोगे,
और हम शाम के बाद तेरी यादों के जश्न से घिर जायेंगे…
वो हंसी शाम जो उधार है तुम्हारी मुझ पर
फक़त उसके सहारे सदियां गुज़ार आये..
जब भी किसी ने बारहा ज़िक्र तेरा किया
खो गयी आंखे दिखायी दूर तक न दिया…
वो जो मिल गया था अचानक किस्मत से
बिना मिले ही बिछड़ गया मुझसे…
ईश्क हम आज भी तुझे बेपनाह करते है
तेरा इंतजार बस अब नहीं करते है…
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