Sad Shayari

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   दर्द इतना था कि मुस्कुराना पड़ गया, दिल टूटकर भी ज़माने को हँसाना पड़ गया। कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगते हैं, पूरे होकर अक्सर दर्द दे जाते हैं। जिसे अपना समझा वही दूर हो गया, दिल का हर सपना चूर हो गया। खामोशी मेरी कमजोरी नहीं, बस अब किसी से शिकायत नहीं। यादें आज भी रातों को जगाती हैं, और तेरी कमी हर पल सताती है। जिसे खोने का डर था, वही सबसे पहले खो गया। आँखों में आँसू छिपा लिए हमने, दुनिया को बस मुस्कान दिखा दी। हर किसी को अपना समझना छोड़ दिया, अब दिल को समझाना सीख लिया। मोहब्बत अधूरी रह जाए तो दर्द बन जाती है, और पूरी हो जाए तो दुआ बन जाती है। तन्हाई अब अपनी सी लगती है, भीड़ में भी कमी तेरी ही खलती है। टूटे हुए दिल की आवाज़ नहीं होती, बस खामोशी बहुत कुछ कह जाती है। बदलते लोगों ने सिखा दिया, हर किसी पर भरोसा नहीं किया जाता। हम मुस्कुराते रहे सबके लिए, और अपना दर्द छुपाते रहे। कुछ बातें दिल में ही रह गईं, कुछ यादें आँखों में बह गईं। अब किसी से उम्मीद नहीं रखते, दर्द से ही दोस्ती कर बैठे। दिल आज भी उसी मोड़ पर खड़ा है, जहाँ तुम...

ज़मीं पर रह कर आसमां छूने की फितरत है मेरी, पर गिरा कर किसी को, ऊपर उठने का शौक़ नहीं मुझे।


वो खुद पे इतना गुरूर करते हैं,
तो इसमें हैरत की बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते हैं,
वो आम हो ही नहीं सकते।


चमक सूरज की नहीं मेरे किरदार की है,
खबर ये आसमाँ के अखबार की है,
मैं चलूँ तो मेरे संग कारवाँ चले,
बात गुरूर की नहीं, ऐतबार की है।


सूरज, चाँद और सितारे मेरे साथ में रहे,
जब तक तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में रहे,
शाखों से जो टूट जाये वो पत्ता नहीं हैं हम,
आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे।


गुजरते लम्हों में सदियाँ तलाश करता हूँ,
प्यास इतनी है कि नदियाँ तलाश करता हूँ,
यहाँ पर लोग गिनाते है खूबियां अपनी,
मैं अपने आप में कमियाँ तलाश करता हूँ।


भूलकर हमें अगर तुम रहते हो सलामत,
तो भूलके तुमको संभलना हमें भी आता है,
मेरी फ़ितरत में ये आदत नहीं है वरना,
तेरी तरह बदल जाना हमें भी आता है।


अंजाम की परवाह होती तो,
हम मोहब्बत करना छोड़ देते,
मोहब्बत में तो जिद्द होती है,
और जिद्द के बड़े पक्के हैं हम।


हम अच्छे सही पर लोग ख़राब कहतें हैं,
इस देश का बिगड़ा हुआ हमें नवाब कहते हैं,
हम ऐसे बदनाम हुए इस शहर में,
कि पानी भी पिये तो लोग उसे शराब कहते हैं।


दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी,
मैं हाथ नहीं उठाता बस नज़रों से गिरा देता हूँ।

बेवक़्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्कुरा देता हूँ,
आधे दुश्मनो को तो यूँ ही हरा देता हूँ।

खोटे सिक्के जो अभी अभी चले हैं बाजार में,
वो कमियाँ निकाल रहे हैं मेरे किरदार में।

अभी शीशा हूँ सबकी आँखों में चुभता हूं,
जब आईना बनूँगा सारा जहाँ देखेगा।

हम बसा लेंगें एक दुनिया किसी और के साथ,
तेरे आगे रोयें अब इतने भी बेगैरत नहीं हैं हम।

बेमतलब की जिंदगी का सिलसिला ख़त्म,
अब जिस तरह की दुनिया उस तरह के हम।

ज़मीं पर रह कर आसमां छूने की फितरत है मेरी,
पर गिरा कर किसी को, ऊपर उठने का शौक़ नहीं मुझे।

हमारी हैसियत का अंदाज़ा तुम ये जान के लगा लो,
हम कभी उनके नही होते, जो हर किसी के हो जाए।

अपनी शख्शियत की क्या मिसाल दूँ यारों
ना जाने कितने मशहूर हो गये मुझे बदनाम करते करते।

इतना भी गुमान न कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर,
शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं।


ये मत समझ कि तेरे काबिल नहीं हैं हम,
तड़प रहे हैं वो जिसे हासिल नहीं हैं हम।

हम जा रहे हैं वहां जहाँ दिल की हो क़दर,
बैठे रहो तुम अपनी अदायें लिये हुए।

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नहीं समझा,
वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नहीं।

चलो आज फिर थोडा मुस्कुराया जाये,
बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये।

रहते हैं आस-पास ही लेकिन पास नहीं होते,
कुछ लोग मुझसे जलते हैं बस ख़ाक नहीं होते।

हाथ में खंजर ही नहीं आँखों में पानी भी चाहिए,
हमें दुश्मन भी थोड़ा खानदानी चाहिए।

अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उँगलियाँ,
जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।

अगर लोग यूँ ही कमियां निकालते रहे तो,
एक दिन सिर्फ खूबियाँ ही रह जायेगी मुझमें।

आग लगाना मेरी फितरत में नही है,
मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या कसूर।

दिखावे की मोहब्बत तो जमाने को है हमसे पर,
ये दिल तो वहाँ बिकेगा जहाँ ज़ज्बातो की कदर होगी।


ठहर सके जो लबों पे हमारे,
हँसी के सिवा है मजाल किसकी।

लाख तलवारे बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ,
सर झुकाना नहीं आता तो झुकाए कैसे।

हमको मिटा सके यह ज़माने में दम नहीं,
हमसे ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं।

हम ना बदलेंगे वक्त की रफ़्तार के साथ,
हम जब भी मिलेंगे अंदाज पुराना होगा।

इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ,
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने।

समंदर बहा देने का जिगर तो रखते हैं लेकिन​,
​हमें आशिकी की नुमाइश की आदत नहीं है दोस्त​।

​मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​,
​मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकल के देख​।

हादसों की ज़द में हैं तो क्या मुस्कुराना छोड़ दें,
जलजलों के खौफ से क्या घर बनाना छोड़ दें।

मार ही डाले जो बे मौत ये दुनिया वाले,
हम जो जिन्दा हैं तो जीने का हुनर रखते है।

मेरी हिम्मत को परखने की गुस्ताखी न करना,
पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चुका हूँ।


Comments

  1. Very very nice Bahut Khoob

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  2. Islye ham aajad parende hain Islye log ham se darte hain

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