परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो,
चलूँगा उसी राह पर जो सीधी और साफ हो।
मेरी आवाज को महफूज कर लो.. मेरे दोस्त
मेरे बाद बहुत सन्नाटा होगा.. तुम्हारी महफ़िल में।
कभी शाम होने के बाद.. मेरे दिल में आकर देखना,
खयालों की महफिल सजी होती है और जिक्र सिर्फ तुम्हारा होता है।
सवर रही है अब वो किसी और के लिए..
पर मैं बिखर रहा हूँ आज भी उसी के लिए।
शतरंज मे वज़ीर और ज़िंदगी मे ज़मीर,
अगर मर जाए तो समझिए खेल ख़त्म।
मोहब्बत और मुकद्दर में बरसों से जिद का रिश्ता है,
मोहब्बत जब भी होती है तो मुकद्दर रूठ ही जाता है।
आसानी से जो कोई मिल जाए तो वो किस्मत की बात है,
सूली पर चढ़कर भी जो ना मिले उसे मोहब्बत कहते है!!
हम तो पागल है जो शायरी में ही दिल की बात कह देते है..
लोग तो गीता पे हाथ रखके भी सच नहीं बोलते।
तेरा नाम लूँ जुबां से तेरे आगे ये सिर झुका दूँ,
मेरा इश्क़ कह रहा है, मैं तुझे खुदा बना दूँ।
हश्र-ऐ-मोहब्बत और अंजाम अब ख़ुदा जाने
तुझ से मिलकर मिट जाना ही मेरा वजूद था।
यूँ ना बर्बाद कर मुझे, अब तो बाज़ आ दिल दुखाने से..
मै तो सिर्फ इन्सान हूँ, पत्थर भी टूट जाता है, इतना आजमाने से।
कभी तुम पूछ लेना, कभी हम भी ज़िक्र कर लेगें..
छुपाकर दिल के दर्द को, एक दूसरे की फ़िक्र कर लेंगे।
ये उड़ती ज़ुल्फें और ये बिखरी मुस्कान,
एक अदा से संभलूँ तो दूसरी होश उड़ा देती है।
सब मुझे ही कहते है की भूल जाओ उसे,
कोई उसे क्यूँ नहीं कहेता की वो मेरी हो जाए।
वफ़ा करनी भी सीखो इश्क़ की नगरी में ए दोस्त..
फ़क़त यूँ दिल लगाने से दिलों में घर नही बनते..!!
गुफ्तगू उनसे होती यह किस्मत कहाँ..
ये भी उनका करम है कि वो नज़र तो आये।
इक झलक देख लें तुझको तो चले जाएंगे..
कौन आया है यहां उम्र बिताने के लिए।
निकल गया तलाश में उसकी मैं पागलों की तरह..
जैसे मुझे अब इंतज़ार नहीं #सनम चाहिये।।
दुआ करो की वो सिर्फ हमारे ही रहे,
क्यूंकि हम भी किसी और के होना नहीं चाहते।
हवस ने पक्के मकान, बना लिये हैं जिस्मों में..
और सच्ची मुहब्बत किराये की झोपड़ी में, बीमार पड़ी है आज भी।
न जाने कब खर्च हो गये, पता ही न चला,
वो लम्हे, जो छुपाकर रखे थे जीने के लिये।
बहुत सा पानी छुपाया है मैंने अपनी पलकों में,
जिंदगी लम्बी बहुत है, क्या पता कब प्यास लग जाए।
न हथियार से मिलते हैं न अधिकार से मिलते हैं,
दिलों पर कब्जे बस अपने व्यवहार से मिलते है।
अपने दिल की अदालत में ज़रूर जाएं,
सुना है, वहाँ कभी गलत फैसले नहीं हुआ करते।
कॉल फ्री होने से क्या होता है साहिब,
दिलों में गुंजाइश भी तो होनी चाहिए बात करने के लिए।
घर अपना बना लेते हैं, जो दिल में मेरे,
मुझसे वो परिंदे, कभी उड़ाये नहीं जाते।
इतना क्यों सिखाए जा रही हो ज़िन्दगी,
हमें कौनसी सदियाँ गुज़ारनी है यहाँ।
यहाँ हर कोई रखता है ख़बर ग़ैरों के गुनाहों की,
अजब फितरत हैं, कोई आइना नहीं रखता।
मन को छूकर लौट जाऊँगा किसी दिन,
तुम हवा से पूछते रह जाओगे मेरा पता।
कौन कहता है माँ का कलेजा दुनिया में सबसे नरम है,
मैंने बेटियों की विदाई में अक्सर पिता को टूटते देखा है।
बेनूर सी लगती है तुमसे बिछड़ कर ये रातें,
चिराग तो जलते है मगर उजाला नही करते।
मिज़ाज़ अपना कुछ ऐसा बना लिया हमने,
किसी ने कुछ भी कहा, बस मुस्करा दिया हमने।
कुछ शिकवे ऐसे थे साहिब,
जो खुद ही कहे और खुद ही सुने।
शायर कहकर बदनाम ना करना मुझे दोस्तो,
मै तो रोज शाम को दिनभर का हिसाब लिखता हूं।
किस लिए, देखते हो तुम आईना,
तुम तो ख़ुद से भी, ज्यादा ख़ूबसूरत हो।
अभी काँच हूँ इसलिए सबको चुभता हूँ,
जिस दिन आइना बन जाऊँगा उस दिन पूरी दुनियाँ देखेगी।
ना खोल मेरे मकान के उदास दरवाज़े,
हवा का शोर मेरी उलझने बढ़ा देते है।
तहज़ीब में भी उसकी क्या ख़ूब अदा थी,
नमक भी अदा किया तो ज़ख़्मों पर छिड़क कर।
कसा हुआ हैं तीर हुस्न का, ज़रा संभलके रहियेगा,
नज़र नज़र को मारेगी, तो क़ातिल हमें ना कहियेगा।
तलब ऐसी कि सांसों में समा लूं तुझे,
किस्मत ऐसी कि देखने को मोहताज हूं तुझे।
तेरे होने का जिसमें किस्सा है,
वही मेरी जिंदगी का बेहतरीन हिस्सा है।
मुझे भी पता है कि तुम मेरी नहीं हो,
इस बात का बार बार एहसास मत दिलाया करों।
याद महबूब की और शिद्दत गर्मी की,
देखते हैं.. हमें कौन.. बीमार करता है।
गज़ब की बेरुख़ी छाई हे तेरे जाने के बाद,
अब तो सेल्फ़ी लेते वक़्त भी मुस्कुरा नही पाते।
हाल मीठे फलों का मत पूछिए साहब,
रात दिन, चाकू की नोंक पे रहते है।
कभी तुम पूछ लेना, कभी हम भी ज़िक्र कर लेगें,
छुपाकर दिल के दर्द को, एक दूसरे की फ़िक्र कर लेंगे।
शाम ढले ये सोच के बैठे हम तेरी तस्वीर के पास,
सारी ग़ज़लें बैठी होंगी अपने-अपने मीर के पास।
निगाहें नाज़ करती है फ़लक के आशियाने से,
खुदा भी रूठ जाता है किसी का दिल दुखाने से।
शायरी पढ़ने तक ही ताल्लुक रखते है लोग,
किसी ने अभी तक हमारी महबूबा का नाम तक नहीं पूछा।
My love name govind
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